
बगहा। बिहार में शराबबंदी के बाद तस्कर शराब की खेप पहुंचाने के लिए लगातार नए तरीके अपना रहे हैं। अब शराब लदी गाड़ियों में महिलाओं को बैठाकर वाहन को पारिवारिक यात्रा का रूप देने की कोशिश का मामला सामने आया है। पश्चिम चंपारण के बगहा में उत्पाद विभाग ने एक कार से 68 लीटर अंग्रेजी शराब बरामद करते हुए तीन लोगों को गिरफ्तार किया था। इनमें शामिल महिला ने कथित तौर पर पूछताछ में बताया कि वह शराब लदी गाड़ियों में सफर करने के बदले प्रतिदिन 10 हजार रुपये लेती थी।
आरोपी महिला सीतामढ़ी की रहने वाली बताई गई है। वह उत्तर प्रदेश सहित दूसरे राज्यों से बिहार आने वाली शराब लदी गाड़ियों में सामान्य यात्री या चालक की रिश्तेदार बनकर बैठती थी। तस्करों को उम्मीद रहती थी कि कार में एक घरेलू महिला को देखकर जांच करने वाले अधिकारी वाहन को पारिवारिक समझकर जाने देंगे। इसी धारणा का फायदा उठाकर शराब की खेप निर्धारित स्थान तक पहुंचाने की कोशिश की जाती थी।
उत्पाद विभाग की कार्रवाई में यह तरीका उस समय सामने आया, जब अधिकारियों ने संदेह के आधार पर दिल्ली नंबर की एक कार को रोककर जांच की। कार चालक ने महिला को अपनी चाची बताया और कहा कि वह उसे बेतिया लेकर जा रहा है। चालक ने वाहन में किसी भी प्रतिबंधित वस्तु के होने से इनकार किया, लेकिन अधिकारियों को उसकी बात और वाहन की स्थिति संदिग्ध लगी।
स्कैनर से पकड़ा गया गाड़ी का तहखाना
उत्पाद निरीक्षक सह थानाध्यक्ष प्रमोद कुमार के मुताबिक, कार की सामान्य जांच में शराब दिखाई नहीं दी। इसके बाद स्कैनर मशीन की सहायता से वाहन की सघन तलाशी ली गई। जांच में कार के भीतर बनाया गया एक विशेष तहखाना सामने आया। इसी गुप्त स्थान में अंग्रेजी शराब की बोतलें छिपाकर रखी गई थीं।
अधिकारियों ने तहखाना खुलवाया तो उसमें से कुल 68 लीटर अंग्रेजी शराब बरामद हुई। कार्रवाई 27 अगस्त को की गई थी। शराब ले जाने में इस्तेमाल कार का पंजीकरण नंबर डीएल-10 सीडी-2388 बताया गया। वाहन को जब्त करते हुए उसमें सवार तीनों लोगों को हिरासत में लिया गया।
गिरफ्तार लोगों में उत्तर प्रदेश निवासी अवध किशोर पांडेय, सीतामढ़ी निवासी संजीव कुमार और महिला शामिल हैं। सभी के खिलाफ बिहार मद्य निषेध एवं उत्पाद अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की गई। विभाग अब शराब भेजने और उसे प्राप्त करने वाले लोगों के बारे में जानकारी जुटा रहा है।
रोज दस हजार रुपये मिलने का दावा
पूछताछ में महिला ने कथित रूप से बताया कि शराब लदी गाड़ियों में सफर करने के लिए उसे प्रतिदिन 10 हजार रुपये दिए जाते थे। मोटी कमाई की चाह में उसने इस काम को स्वीकार किया था। उसका काम गाड़ी में सामान्य घरेलू महिला या चालक की रिश्तेदार बनकर बैठना था, ताकि वाहन को देखने पर संदेह कम हो।
महिला से पूछताछ में सामने आए दावे अभी उत्पाद विभाग की जांच का हिस्सा हैं। अदालत में साक्ष्यों के आधार पर ही आरोपों की अंतिम पुष्टि होगी। गिरफ्तारी मात्र से किसी व्यक्ति को दोषी नहीं माना जा सकता। वाहन से बरामद शराब, गुप्त तहखाना, मोबाइल संपर्क और अन्य साक्ष्यों को कानूनी प्रक्रिया में प्रस्तुत किया जाएगा।
मामले से जुड़े घटनाक्रम और 68 लीटर शराब की बरामदगी की जानकारी में भी दी गई है।
महिला को चाची बताकर भ्रमित करने की कोशिश
कार रोके जाने पर चालक ने अधिकारियों को बताया था कि महिला उसकी चाची है। उसने दावा किया कि वह उसे बेतिया लेकर जा रहा था। बताया गया कि चालक बार-बार गाड़ी में प्रतिबंधित सामान नहीं होने की बात कहता रहा। उसने कार में महिला की मौजूदगी को भी अपनी बात सही साबित करने के लिए इस्तेमाल किया।
हालांकि अधिकारियों ने केवल वाहन में महिला सवार होने के आधार पर उसे छोड़ने के बजाय तकनीकी उपकरण से जांच की। स्कैनर के उपयोग से गाड़ी में किए गए संरचनात्मक बदलाव का पता चल गया। इससे विशेष तहखाना बनाकर शराब छिपाने की कोशिश नाकाम हो गई।
यह मामला बताता है कि तस्करी रोकने के लिए केवल वाहन में बैठे लोगों की सामान्य छवि पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। संदिग्ध वाहनों की जांच तकनीकी सूचना, वाहन की बनावट, दस्तावेज और अन्य परिस्थितियों के आधार पर करने की जरूरत है। किसी महिला या परिवार की मौजूदगी वाहन को जांच से स्वतः छूट देने का आधार नहीं हो सकती।
शराब तस्करी में बदल रहे तरीके
बिहार में अप्रैल 2016 से पूर्ण शराबबंदी लागू है। इसके बावजूद पड़ोसी राज्यों और नेपाल की सीमा से शराब की अवैध आपूर्ति के मामले सामने आते रहते हैं। तस्कर कभी वाहनों में गुप्त तहखाने बनाते हैं तो कभी दूध, फल, सब्जी, दवा या अन्य सामान के बीच शराब की बोतलें छिपाने का प्रयास करते हैं।
ट्रेन, बस और निजी कारों के माध्यम से भी शराब पहुंचाने की कोशिश की जाती है। हाल के वर्षों में महिलाओं को शराब ढोने या वाहन को पारिवारिक यात्रा जैसा दिखाने के लिए इस्तेमाल किए जाने के मामले भी सामने आए हैं। अधिकारियों के मुताबिक तस्करी के बदलते तरीकों को देखते हुए जांच व्यवस्था में स्कैनर, खुफिया सूचना और डिजिटल निगरानी का इस्तेमाल बढ़ाया जा रहा है।
नेटवर्क से जुड़े लोगों की तलाश
उत्पाद विभाग पकड़े गए लोगों के मोबाइल फोन, कॉल रिकॉर्ड और वित्तीय लेन-देन के आधार पर नेटवर्क के दूसरे सदस्यों तक पहुंचने का प्रयास कर रहा है। जांच का प्रमुख सवाल यह है कि शराब कहां से लाई गई थी, उसकी आपूर्ति किसने की और बिहार में खेप किस व्यक्ति को सौंपी जानी थी।
अधिकारियों को यह भी पता लगाना है कि महिला इससे पहले कितनी बार शराब लदी गाड़ियों में यात्रा कर चुकी थी और प्रतिदिन 10 हजार रुपये देने वाला कथित सरगना कौन है। जांच में यदि अन्य वाहनों या लोगों की भूमिका सामने आती है तो और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
इस कार्रवाई ने तस्करों की उस रणनीति को उजागर किया है, जिसमें सामाजिक धारणाओं का इस्तेमाल जांच से बचने के लिए किया जा रहा था। उत्पाद विभाग ने स्पष्ट किया है कि शराब तस्करी में शामिल व्यक्ति चाहे किसी भी वर्ग या लिंग का हो, साक्ष्य मिलने पर कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।





